रवींद्रनाथ टैगोर
चित्रों और शब्दों में जीवन कथा
Paper Type: 130 gsm art paper (matt) | Size: 235mm x 178mm; 236pp
All colour; 168 photographs
ISBN-13: 978-93-89136-24-1

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रवींद्रनाथ टैगोर...यह नाम हमारे हृदय के बहुत क़रीब है, जिसे देखते और सुनते ही मन में सम्मान, विस्मय और प्रेरणा के भाव पैदा होने लगते हैं। साथ ही, इस बहुमुखी प्रतिभा के बारे में और ज़्यादा जानने की उत्सुकता बढ़ने लगती है। उनके जीवनीकारों ने टैगोर के कार्यों का विश्लेषण उनके जीवनकाल में किया है या फिर उनके कालक्रम के संबंध में किया है। यह पुस्तक तत्कालीन संदर्भों में उनके योगदान की कालक्रम के अनुसार प्रस्तुति करते हुए उन महत्वपूर्ण घटनाओं, चर्चाओं और उपेक्षित मुद्दों को भी प्रकाश में लाती है, जिनसे टैगोर को बेहतर तरीक़े से समझ पाने में मदद मिलती है। 

एक पुत्र, भाई, पति और पिता के रूप में उनकी भूमिका  सराहनीय रही। कवि, लेखक, दार्शनिक, चित्रकार, नृत्य-संयोजक और अभिनेता के रूप में उनकी उपलब्धियाँ चरमोत्कर्ष पर रहीं। परिवार, मित्रों, समकालीन लेखकों, कवियों तथा अपने पूर्ववर्तियों से उनके संबंध भी ठीकठाक रहे। देश-विदेश के समकालीन नेताओं से उनका पत्र-व्यवहार और जीवन के बारे में उनकी सोच एवं अभिव्यक्तियाँ सटीक रहीं। इस तरह  प्रेम, विश्वास, समर्पण, उनके अधूरे सपनों और अपेक्षाओं आदि को बहुत रोचक तरीक़े से प्रस्तुत करते हुए यह पुस्तक कवि के दोनों पक्षों—असाधारण योग्यता-संपन्न व्यक्ति और सामान्य इच्छाओं वाला व्यक्ति—को सामने लाती है, जो इस गुण के कारण अपनी लाभ-हानि की परवाह किए बिना सामान्य लोगों के सुखों और दुखों को समझ सकता था। यही वह कारण है कि टैगोर जाति, सिद्धांत या पंथ की सीमाओं के पार, आज भी हम सबको प्रिय हैं। 



Nityapriya Ghosh
Nityapriya Ghosh
Author

Born (3 December 1934) at Barisal town, Nityapriya Ghosh came to Calcutta with his family in 1947. He studied in Hindu School, Presidency College and Calcutta University. After a stint as a college lecturer in English and a brief tenure in the Government of India’s central civil service, he was a corporate publicity and public relations executive, retiring from service in 1992.

Working as an assistant editor in 1966-1967 with Samar Sen, the editor of Now, he wrote a monograph on him, for Sahitya Akademi, New Delhi, in 1990. He contributed to The Statesman, Calcutta, as its weekly television columnist for ten years. A book reviewer for newspapers and magazines, he has co-edited a book of documents on the Partition of Bengal, 1905. He has written three books of essays in Bengali on popular literature. A prolific writer, he has also written and edited several books on Rabindranath Tagore; Dakgharer Harkara, Ranur Chithi Kabir Sneha, The English Writings of Rabindranath Tagore, Vol. 4 (edited), Mukher Katha Lekhar Bhashay, Vol. 1-4 (edited) and In the Company of a Great Man being a few of them.

नित्यप्रिय घोष का जन्म (3 दिसंबर 1934) बारीसाल में हुआ था, जहाँ से उनका परिवार 1947 में कलकत्ता आ गया था। उन्होंने हिंदू स्कूल, प्रेसीडेंसी कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की। कुछ समय तक एक महाविद्यालय में अंग्रेज़ी के व्याख्याता और थोड़े समय तक भारत की केंद्रीय सिविल सेवा में रहने के बाद उन्होंने काॅरपोरेट जगत में प्रचार एवं जनसम्पर्क का क्षेत्र चुना और वहाँ से 1992 में सेवानिवृत्त हुए। सन 1966-67 में नाउ के सम्पादक समर सेन के साथ सहायक सम्पादक के रूप में काम कर चुके नित्यप्रिय ने साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के लिए 1990 में समरसेन पर मोनोग्राफ लिखा। उन्होंने दि स्टेट्समैन (कलकत्ता) में 10 वर्षों तक साप्ताहिक टेलीविजन समीक्षक के रूप में योगदान दिया। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए पुस्तक-समीक्षा करते हुए उन्होंने 1905 के बंगाल विभाजन से संबंधित दस्तावेज़ों की एक पुस्तक का सह-सम्पादन किया है। लोकप्रिय साहित्य पर उनके निबंधों की तीन पुस्तकें प्रकाशित हैं। निरंतर सृजनरत लेखक नित्यप्रिय ने रवींद्रनाथ टैगोर पर भी कई पुस्तकों का लेखन और सम्पादन किया है– डाकघरेर हरकारा, रानूर चीठी कबिर स्नेहा, दि इंग्लिश राइटिंग्स ऑफ रवींद्रनाथ टैगोर, खंड 4 (सम्पादन), मुखेर काथा लेखार भाषाय, खंड 1-4 (सम्पादन) तथा इन दि कम्पनी ऑफ ए ग्रेट मैन आदि उनकी पुस्तकों में शामिल हैं।

श्रीकांत  अस्थाना
श्रीकांत अस्थाना
Translator

पत्रकार एवं पत्रकारिता शिक्षक के रूप में उत्तर भारत के विभिन्न प्रमुख हिंदी और अंग्रेज़ी समाचार-पत्रों एवं विश्वविद्यालयों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे श्रीकांत अस्थाना को मुख्यतया हिंदी पत्रकारिता में तकनीकी समावेशन, नवाचार, मूल्यनिष्ठा एवं गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। वर्तमान में वह महाराष्ट्र के प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक लोकमत टाइम्स के उत्तर प्रदेश संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। अनुवादक के रूप में उन्होंने राजनीति, आयुर्वेद, कला आदि विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित पुस्तकों का अंग्रेज़ी से हिंदी तथा हिंदी से अंग्रेज़ी में अनुवाद किया है।