अर्घ्य
Paper Type: | Size:
ISBN-10: 9389136601 | ISBN-13: 978-9389136609

 895

‘अर्घ्य’ अपर्णा नेवटिया की एक प्रयोगात्मक कृति है, जो ईश्वर, संसार और मानव के अनोखे सम्बंध का चिांकन करती है। यहाँ रचनाकार ने ईश्वर को संसार से अलग नहीं देखा बल्कि उसके लिए साधारण मानव और उसका संसार साकार ईश्वर का ही दर्शन है। 

विषय की गहराई को पाठकों के सम्मुख व्यक्त करने के लिए चिाें के द्वारा दृश्य को वाणी तथा कविता के द्वारा शब्दों को जीवन के रंग देने का प्रयास किया गया है। कहीं विपदा से घिरा मानव स्त है तो कहीं वह वैराग्य के सिंघासन पर आसीन उदासीन है। मोहवश जीवात्मा कभी ईश्वर से प्रश्न करती है तो कभी गुरु के शरण में आकर मोक्ष माँगती है। योगमाया प्रकृति जीवात्मा की इस शब्द - चि याा में चिर स्थायी सहयाी है। आकार और ध्वनि के नित्य सम्बंध को स्थापित करते, एक दूसरे के पूरक, छायाचि और कविताएँ पाठकों को प्रकृति के विशेषतः निकट ले जाते हैं।




अपर्णा  नेवटिया
अपर्णा नेवटिया
Author

अपर्णा नेवटिया एक आध्यात्मिक गुरु, लेखिका, तथा ‘आत्म ज्ञान ध्यान साधना’ की प्रणेता है। विगत कई वर्षों से वे श्रीमद्भगवतगीता तथा ध्यान साधना का यौगिक विज्ञान के आधार पर प्रचार प्रसार कर रही हैं ।

अपर्णा जी ने 30 सितंबर 2011 में रिजुविनेशन - अ स्पिरिचुअल फाउंडेशन’ की स्थापना की, जिसके अंतर्गत अन्नदान व शिक्षा सम्बन्धी अनेक सामाजिक कार्य किए जाते हैं। वे अपने आनंदमय स्वभाव, तीक्ष्ण बुद्धि व सटीक उत्तरों के लिए युवा वर्ग में विशेष पसंद की जाती हैं। उन्होंने अनेक विश्वविद्यालयों में कर्म, समय की अस्तित्वहीनता, युवा वर्ग में तनाव तथा स्त्रियों की उन्नति आदि विषयों पर प्रसिद्ध व्याख्यान दिए हैं। अपर्णा जी की एक अन्य पुस्तक “कण - कण में भगवान” गहन साधनात्मक अनुभवों पर आधारित है और आध्यात्मिक जगत में विशेष स्थान रखती है।