एम. एफ़. हुसेन
कला का कर्मयोगी
Paper Type: 130 gsm art paper (matt) | Size: 240 mmx 184mm
All colour; 90 photographs
ISBN-10: 93-86906-56-4 | ISBN-13: 978-93-86906-56-4

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मक़बूल फि़दा हुसेन: इस नाम से जुड़े अनगिनत ख़याल और किस्से उन लोगों के ज़हन में हैं, जो किंवदंती बन चुके इस कलाकार की शख़्सियत से वाकि़फ़ हैं। माहिर चिकार, रंगीन व्यक्तित्व, अलग कि़स्म के फिल्मकार, महँगी से महँगी कारों के आशिक़, नंगे पाँवों चलने वाले चिकार, प्रेरणा देने वाली महिलाओं के बड़े कद्रदान थे ये हुसेन! वे उन लोगों के लिए भी एक पहेली थे, जो उन्हें अच्छी तरह जानते थे। इसमें कोई संदेह नहीं कि हुसेन दुनिया के महानतम चिकारों में एक हैं। उनकी कला को समझने की कोशिश में कई किताबें लिखी गई हैं, मगर इस कि़ताब में अलग नज़रिया है। इसमें हुसेन के अनेक आयामों और उनके चिकार के पीछे के शस को सामने लाने की कोशिश की गई है। एम.एफ. हुसेन दरअसल रंक से राजा बनने की एक प्रेरक कथा है। वे हमेशा सच्चे कलाकार रहे। होर्डिंग बनाने, फर्नीचर डिज़ाइन करने, फिल्में बनाने या खाना बनाने में भी उनका हुनर साफ़ नज़र आता था। रचनात्मक अभिव्यक्ति मक़बूल के चिों में ही नहीं, बल्कि खुद को बड़ा दर्जा देने वाले स्थानों और लोगों के प्रति प्रेम में भी नज़र आती थी। उनके चिों, रुचियों, निजी जीवन और दुखों पर रोशनी डालने वाली अनेक घटनाएँ हैं। इस किताब में उनके जीवन के इन्हीं कि़स्सों के जरिए इस बहुआयामी कलाकार के व्यक्तित्व पर रोशनी डालने की कोशिश की गई है।



Pradeep  Chandra
Pradeep Chandra
Author

Pradeep Chandra is known for his versatility. An eminent photographer, he has written coffee-table books on MF Husain, Amitabh Bachchan and Aamir Khan. He is also an artist who has participated in several art camps and group shows in India and abroad. As a photojournalist, Chandra has been associated with The Illustrated Weekly of India, The Times of India, The Indian Express, The Week and The Sunday Observer, among others.

प्रदीप चंद्र की पहचान एक नामवर छायाकार की रही है। द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप, द इंडियन एक्सप्रेस और द वीक जैसे देश के प्रतिनिधि समाचार पत्रों के साथ लंबे समय तक कार्य किया और फ़ोटो पत्रकारिता में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया।

कैमरे के पीछे प्रदीप चंद्र की एक अनुभवी आँख ही नहीं सृजनात्मक सोच भी रही है और यही कारण है कि उनके चित्र समाचार पत्र-पत्रिकाओं के पृष्ठों तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि कला दीर्घा की दीवारों तक भी पहुंचे हैं। प्रदीप चंद्र ने कश्मीरी विस्थापितों, राजस्थान की हवेलियों और कमाठीपुरा के बच्चों जैसे विषयों पर प्रतिष्ठित आर्ट गैलेरियों में प्रदर्शनियाँ की हैं जिन्हें कला जगत में काफ़ी सराहा भी गया।

छाया चित्रकारी की अपनी लंबी यात्रा में प्रदीप चंद्र, हिंदी सिने जगत के बड़े और चर्चित कलाकारों के बदलते और ढलते हुए चेहरों को अपने कैमरे के माध्यम से बहुमूल्य दस्तावेज़ में बदलते रहे हैं।

कला और फ़िल्म जगत में लगभग चार दशकों के अपने संबंधों के दौरान जमा की गई चित्रों और स्मृतियों की पूंजी को फ़िल्म और कला रसिकों तक पहुँचाना प्रदीप चंद्र की रचनात्मक ज़रुरत भी थी और कलात्मक ज़िम्मेदारी भी लिहाज़ा उन्होंने अमिताभ बच्चन, एम. एफ़. हुसैन, आमिर ख़ान और अभिषेक बच्चन पर काॅफ़ी टेबल बुक लिखी हैं और ये सिलसिला निरंतर जारी है।

प्रदीप चंद्र मुंबई में रहते हैं और सपनों की नगरी मुंबई के बारे में एक किताब पर काम कर रहे हैं।

भुवेन्द्र  त्यागी
भुवेन्द्र त्यागी
Translator

भुवेन्द्र त्यागी मेरठ विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए.। नवभारत टाइम्स, मुंबई में न्यूज एडिटर। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विविध विषयों पर 2,500 से ज्यादा लेख प्रकाशित। आकाशवाणी, विविध भारती और बीबीसी से 250 से अधिक कार्यक्रम प्रसारित। 8 पुस्तकों का लेखन, सह-लेखन, संपादन और अनुवाद। कई डॉक्युमेंट्री फिल्मों का लेखन।