अपने बच्चों को कैसे खिलायें? (और इसका लुत्फ़ लें)
Paper Type: 130 gsm art paper (matt) | Size: 190mm x 178mm
All colour; 250 Illustrations
ISBN-10: 93-86906-81-6 | ISBN-13: 978-93-86906-81-6

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अपने बच्चों को कैसे खिलायें? (और इसका लुत्फ़ लें)– यह पुस्तक शिशुकाल से लेकर, उनके धीरे-धीरे बड़े होने और स्कूल जाने की आयु तक वाले आपके बच्चों को पारम्परिक भारतीय पौष्टिक भोजन के विषय को लेकर लिखी गई है। हमारी दादी और माँ के द्वारा स्वाद और सेहत को ध्यान में रखते हुए प्रयोग में लाई गई सामग्री, खाना बनाने की तरह-तरह की विधियाँ और हमें प्रेम से खिलाना ही इस पुस्तक का मूल आधार है। आसानी से बनाए गए ये व्यंजन आपके बच्चों को बहुत पसंद आएँगे, ऐसा मेरा विश्वास है। इसमें दिन-प्रतिदिन के सामान्य भोजन से कुछ अलग हटकर– रुचिकर सूप़, स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन और स्वास्थ्यप्रद स् नैक्स, नए-नए स्कूल टिफ़िन, त्योहारों के खाने आदि अनेक व्यंजनों की विधियाँ दी गईं हैं। यह पुस्तक न केवल भारत में, अपितु विश्व में रहने वाली भारतीय माताओं के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। 

बच्चों को कैसे खिलाएँ (और इसका लुत्फ़ लें) ने आपकी माँ की रसोई की कल्पना को फिर से साकार कर दिया है। साथ ही आज की कामकाजी माताएँ, जो अति व्यस्त होते हुए भी अपने बच्चे को पौष्टिक आहार देने का महत्व समझती हैं, यह पुस्तक उनके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। लेखिका के अपने दो बच्चों को बड़ा करने के अनुभवों पर आधारित इस पुस्तक के सभी व्यंजन कम समय में और सरलता से बनने वाले हैं। इस पुस्तक में खाने के पारम्परिक तरीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक जानकारी और आजकल के बच्चों की खाने के प्रति बदलती रुचियों को भी ध्यान में रखा गया है।



Dr. Tabinda J. Burney
Dr. Tabinda J. Burney
Author

Dr Tabinda J Burney is a mother of two girls, nine and five years of age and lives in London. She was born and brought up in New Delhi, India. She studied medicine at the Lady Hardinge Medical College and specialised in Respiratory Medicine. After having worked in several major hospitals in Delhi, she moved to UK where she works in a NHS hospital and divides her time between work and looking after her family, cooking especially to ensure that her children eat healthily. She enjoys gardening, travelling, reading and swimming. She has translated fiction for Urdu short story anthologies and published several academic papers for medical journals.

डॉ. ताबिन्दा जे. बर्नी दो बेटियों की माँ हैं। एक नौ और दूसरे पाँच वर्ष की है और वे लंदन में रहती हैं। वह पैदा नई दिल्ली, भारत में हुईं और उन्होंने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा का अध्ययन किया और श्वसन चिकित्सा में विशेषता प्राप्त की। दिल्ली के कई प्रमुख अस्पतालों में काम करने के बाद, वह ब्रिटेन चली गईं जहाँ वह एक एनएचएस अस्पताल में काम करती हैं और अपने परिवार की देखभाल के लिए भी अपना समय निकाल लेती हैं। खासकर यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसके बच्चों को स्वस्थ खाना मिलें। वह बागवानी, यात्रा, पढ़ना और तैराकी का आनंद लेती हैं। उन्होंने उर्दू लघु कथा संग्रहों के लिए उपन्यास का अनुवाद भी किया है और चिकित्सा पत्रिकाओं के लिए कई अकादमिक प तैयार किए हैं।

Manju Khanna
Manju Khanna
Translator

मंजु खन्ना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. (संस्कृत) एवं बी. लिब. किया है। वे 37 वर्षों तक भारत सरकार में कार्यरत रहने के साथ साथ 30 वर्षों से प्रकाशन जगत से भी जुड़ी रही हैं।