Book Cover


बिस्मिल्लाह ख़ान
बनारस के उस्ताद
Paper Type: 130 gsm art paper (matt) | Size: 240mm x 184mm
All colour; 123 photographs
ISBN-10: 93-86906-58-8 | ISBN-13: 978-93-86906-58-8

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“बिस्मिल्लाह ख़ान - बनारस के उस्ताद वह किताब है जो पाठकों को भारत के सबसे महान कलाकारों में से एक के दिल और घर-परिवार ही नहीं उनके ख़्याल और मौसीकी से भी रू-ब-रू करती है। यह डुमरांव जैसे छोटे क़स्बे से बनारस और फिर दुनिया तक के सफ़र को बयां करती है। यह किताब बिस्मिल्लाह ख़ान के बचपन से लेकर बड़े होने तक, शागिर्द से उस्ताद, शिष्य से दिग्गज बनने तक या शुरुआती दिनों में एक कार्यक्रम का मेहनताना पांच रुपये से हर पेशकश के लिए पांच से दस लाख रुपये के बीच कुछ भी लेने तक उनकी पूरी कहानी बताती है। 

बिस्मिल्लाह ख़ान की ज़िन्दगी बनारस की सड़कों, गलियों और मुहल्लों, इसके घाटों, मंदिरों, महफ़िल और साज़िन्दों के आसपास घूमती है, जो इसको उनके साथ गुज़रा हुआ एक युग बना देती है। लेखिका ने बखूबी बीसवीं सदी के बनारस में इसके क़िरदार और अंदाज़ को तरोताज़ा कर दिया है। इस किताब के लिए रईस रजवाड़ों, गणिकाओं और कई कलाकारों से बातचीत की गई। बिस्मिल्लाह ख़ान की असाधारण प्रतिभा के लिए बनारसी समाज के रंगीन ताने-बाने को एकदम सही पृष्ठभूमि के रूप में देखा गया। यह किताब बिस्मिल्लाह ख़ान की सनकी मिज़ाज और कमजोरियों को भी उसी ख़ूबसूरती से बताती है- मौसीकी के दिग्गज इस कलाकार का कद उसकी हाज़िरजवाबी, दिल्लगी और करिश्मे को कभी भी छिपा नहीं सकता हैं।



Juhi  Sinha
Juhi Sinha
Author

Juhi Sinha is a filmmaker and author. She runs her own production house and has written, produced and directed programmes that have been telecast on both Doordarshan and satellite channels and have been screened at film festivals in India and abroad. Besides writing articles for leading newspapers and magazines in India, she has written for children, (Scholastic India) as well as several short stories for general readership, which have won international acclaim. Her last book “Beyond the Dunes – Journeys in Rajasthan” was published by Penguin India in 2007.